माँ भगवती के रजस्वला होने का अद्भुत रहस्य | Secret of Maa Bhagwati's menstruation



Secret of Maa Bhagwati's menstruation

सती स्वरूपिणी आदिशक्ति कामाख्या तीर्थ विश्व प्रसिद्ध तीर्थ माना जाता है। इस शक्तिपीठ में कौमारी पूजा अनुष्ठान का भी अत्यन्त महत्त्व है यहाँ आदि-शक्ति कामाख्या कौमारी रूप में सदा विराजमान हैं यहाँ आने वाले साधक हर प्रकार का भेदभाव भूल कर माता की आराधना करते है भेद करने वालो से माता रुष्ठ हो जाती है और साधक की सिद्धियाँ नस्ट हो जाती है। 

अम्बुवाची पर्व: 

जिस प्रकार उत्तर भारत में कुंभ महापर्व का महत्त्व माना जाता है, ठीक उसी प्रकार उससे भी श्रेष्ठ इस आदि-शक्ति के अम्बुवाची पर्व का महत्त्व है। यहाँ हर साल जून के महीने में अम्बुबाची मेला लगता है।इस मेले के दौरान 3 दिन तक मंदिर बंद रहता है, देवी के मासिक धर्म के दौरान यहाँ कि मुख्य ब्रह्मपुत्र नदीनदी का पानी भी 3 दिन के लिए रक्त वर्ण हो जाता है।

माता के रजस्वला होने का रहस्य:

  • इस पर्व में माँ भगवती के रजस्वला होने से पूर्व गर्भगृह स्थित महामुद्रा पर सफेद वस्त्र चढ़ाये जाते हैं, जो कि रक्तवर्ण हो जाते है
  • मंदिर के पुजारियों द्वारा ये वस्त्र प्रसाद के रूप में श्रद्धालु भक्तों में विशेष रूप से वितरित किये जाते हैं।
  • आसम के गुहावती में स्थित यह मंदिर माता सती के 52 शक्ति पीठो में एक है, यह गुवाहाटी शहर के निकट ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य भाग में टापू के ऊपर स्थित है
  • यह तांत्रिकों का सर्वोच्च सिद्ध सती का शक्तिपीठ है। इस टापू को मध्यांचल पर्वत के नाम से भी जाना जाता है, इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दिव्य आलौकिक शक्तियों का अर्जन तंत्र-मंत्र में पारंगत साधक अपनी-अपनी मंत्र-शक्तियों का अनुष्ठान कर स्थिर रखते है।
  • यही वक़्त होता है जब विश्व के सबसे प्राचीनतम आगम मठ के विशिष्ट तांत्रिक यहा अपनी साधना करने आते है। इस पर्व पर भारत ही नहीं बल्कि देश दुनिया के तंत्र साधक यहाँ आकर अपनी साधना के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त करते हैं। वाममार्ग साधना का तो यह सर्वोच्च पीठ स्थल है। 


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मंदिर से जुडी पौराणिक कथा: 

पौराणिक कथाओ के अनुसार जब सती के पिता प्रजापति दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन  किया था सती यज्ञ का हिस्सा बनना चाहती थीं लेकिन उनके पति भगवान शिव ने उन्हें अनुमति नहीं दी थी। सती ने अपने पति की बात अस्वीकार करते हुए पिता के यज्ञ में गई और उनके आगमन पर उनके पिता ने उनके पति शिव का अपमान किया सती अपने पिता की बातो से नाराज होकर यज्ञ की अग्नि में कूद कर अपना शरीर त्याग कर दिया। भगवान शिव अपनी पत्नी के निधन से बहुत क्रोधित हुए। उसने अपनी पत्नी के शव को ले जाकर तांडव करना शुरू कर दिया। भगवान शिव के तांडव को विनाश का नृत्य माना जाता है। 

सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने हस्तक्षेप किया और इसलिए उन्होंने माता सती के मृत शरीर को नस्ट करने के लिए अपने सुदर्शन का उपयोग किया और इसे 108 भागों में काटा। कामाख्या मंदिर वह स्थान माना जाता है जहाँ सती का गर्भ और योनि भाग गिरा था, इसलिए इस स्थान को नारी शक्ति और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है।

Secret of Maa Bhagwati's menstruationSecret of Maa Bhagwati's menstruation

मंदिर में नहीं है कोई भी देवी की प्रतिमा: 

कामाख्या मंदिर पहला हिस्सा सबसे बड़ा है, वहीं दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहाँ एक पत्थर से हर वक़्त पानी निकलता रहता है, यहाँ देवी की कोई भी प्रतिमा मौजूद नहीं है, यहाँ समतल चट्टान के रूप में बनी योनि रूप की पूजा होती है। यहाँ आने वाले भक्तों की भीड़ हमेसा बनी रहती है। माता यहाँ आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी करती है। मनोकामना पूर्ति हेतु यहाँ पशुओं की बलि भी दी जाती हैं। 

उमानंद भैरव के दर्शन बिना नहीं मिलता यात्रा का फल: 

यहाँ नीलकण्ड पर्वत पर बाबा भैरव नाथ का मंदिर स्थित है, जहाँ के दर्शन बिना श्रद्धालुओ के दर्शन अधूरे माने जाते है। भक्त यहाँ के दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण करते है। 

कामाख्या माता का मंदिर तक कैसे पहुँचे: 

यह मंदिर गुवाहाटी हवाई अड्डे से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित है। मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी दूर है। यह देश के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है। कामाख्या रेलवे स्टेशन मंदिर के करीब है। मंदिर की दूरी गुवाहटी से करीब 8 किलोमीटर है।

माँ भगवती के रजस्वला होने का अद्भुत रहस्य | Secret of Maa Bhagwati's menstruation माँ भगवती के रजस्वला होने का अद्भुत रहस्य | Secret of Maa Bhagwati's menstruation Reviewed by Bharat Darshan on अगस्त 16, 2021 Rating: 5

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